Best Anmol Vachan in Hindi with Images-200+अनमोल वचन

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विचारकों की अनमोल वचन best Anmol vachan in Hindi आपके अपने भाषा हिंदी में

विचार हमेशा प्रेरित करेगा यही उम्मीद के साथ  Quotes आपको समर्पित है

 

अनमोल वचन -Best Anmol Vachan in Hindi with Images

 

शिक्षाप्रद सुविचार Hindi Eductional Quotes,Niti Vachan,Best Anmol Vachan in Hindi with Images

संसार के सब धर्मग्रंथों को हमें उसी तरह ग्रहण करना चाहिए, जिस भाव से हम रसायन-शास्त्र का अध्ययन करते हैं, जहां हम अपनी प्रत्यक्ष अनुभूति को ही अंतिम प्रमाण मानते हैं।

स्वामी रामतीर्थ

शिक्षा का सही नियम या तरीका यह है कि सर्वोत्तम पात्र के प्रति सर्वाधिक परिश्रम करो। खराब जमीन पर कभी श्रम न गंवाओ, परंतु अच्छी या अच्छी होने की क्षमता रखने वाली भूमि पर कोई कसर न रखो।

रस्किन

शिक्षा ही हमारी एकमात्र सुरक्षा है। शिक्षारूपी नौका के बाहर तो बाढ़ ही बाढ़ है।

एच. मान

हमारे जीवन का प्रत्येक अगला दिन पिछले दिन की अपेक्षा कुछ इस ढंग का हो, जिसमें हमने सीखा हो।

रवींद्रनाथ ठाकुर

शिक्षित मूर्ख, अशिक्षित की अपेक्षा अधिक मूर्ख होता है।

-मोलियर

अक्षर पोथी में पढ़ो, अर्थ जीवन में खोजो।

-विनोबा भावे

अच्छी पुस्तकें के पास होने से हमें मित्रों के साथ न रहने की कमी नहीं खलती है।

महात्मा गांधी

पुस्तकें वे प्रकाश-स्तंभ हैं जो समय के विशाल समुद्र में खड़े किए गए

-विपिनचंद्र पाल

ठोकर लगे और दर्द उठे, तभी मैं सीख पाता हूँ।

-महात्मा गांधी

पुस्तक विचारों के युद्ध में अस्त्र का काम करती है।

-बनार्ड शॉ

माता के समान शरीर का पोषक नहीं, चिंता के समान शरीर का शोषक नहीं, पत्नी के समान शरीर की तोषक नहीं, तथा विद्या के समान शरीर का आभूषण नहीं।

-अज्ञात

संसार में जितने प्रकार की प्रप्तियां हैं, उनमें शिक्षा सबसे बढ़कर है।

-निराला

अध्ययन आनंद, अलंकरण और योग्यता का काम करता है।

बेकन

सुनना सीखो। तुम्हें उन लोगों से भी लाभ होगा, जो ठीक से बात करना नहीं जानते।

फ़्लूटार्क

जिन्होंने विद्या नहीं प्राप्त की, वे अंधे हैं।

– महात्मा गांधी

खूबसूरत सुविचार -शिक्षा

सबसे बड़ा धन विद्या है, जिसे न कोई छीन सकता है और न ही बुरा सकता है।

-विनोबा भावे

शिक्षक उस मोमबत्ती के समान है जो खुद को जलाकर दूसरों को उजाला देता है।

-ईश्वरचंद्र विद्यासागर

धन खर्च करने से घटता है; विद्या खर्च करने से बढ़ती है।

-अज्ञात

विद्वत्ता से मनुष्य अपना योग्य साथी बन जाता है।

-यंग

शिक्षा जीवन की विभिन्न परिस्थितियों को निभाने की योग्यता है।

-जान हिवन

शिक्षा मनुष्य की आत्मा के लिए उसी तरह है जिस प्रकार संगमरमर के लिए शिल्प-कला।

-एडीसन

यदि मनुष्य सीखना चाहे तो उसकी प्रत्येक भूल कुछ न कुछ शिक्षा दे सकती हैं।

-चार्ल्स डिकेंस

जीवन का रहस्य विलास-भोग में नहीं बल्कि अनुभव के द्वारा शिक्षा-प्राप्ति

में है।

-स्वामी विवेकानंद

शिक्षा में किसी प्रकार की भी संकीर्णता शिक्षा के वास्तविक लक्ष्य का नाश कर देती है।

-गणेशशंकर विद्यार्थी

जो शिक्षा हमें प्राचीन संस्थाओं तथा प्राचीन विचारों में ही फांसे रखे, वह शिक्षा अर्वाचीन समय में शिक्षा कहलाने योग्य नहीं।

-गणेशशंकर विद्यार्थी

अविद्या नश्वर फल उत्पन्न करती है जो क्षणिक होते हैं, मानो वे प्रातःकाल उत्पन्न होते हैं और सायंकाल नष्ट हो जाते हैं।

-आदि शंकराचार्य

विद्वत्ता अच्छे दिनों में आभूषण है, विपत्ति में सहायक एवं बुढ़ापे में संचित सामग्री है।

-अरस्तू

संत सौ युगों का शिक्षक होता है।

-एमर्सन

पानी से न डरना एक बात है और बिना तैरना जाने अथाह समुद्र में कूद पड़ना दूसरी बात है। दूसरी दशा में आदमी मूर्ख ही कहा जाएगा।

-सर्वदानंद

चींटी से अच्छा कोई उपदेश नहीं दे सकता और वह मौन रहती है।

-फ्रेंकलिन

मनुष्य को चाहिए कि यदि दीवार पर भी उपदेश लिखा हुआ मिले तो उसे अवश्य ग्रहण करे।

-शेख सादी

सच्ची विद्या उस समय आरंभ होती है जब मनुष्य सब बाहरी सहारों को छोड़कर अपनी भीतरी अनंतता की ओर ध्यान देता है।

-स्वामी रामतीर्थ

पुस्तकों का संकलन ही आज के युग का वास्तविक विद्यालय है।

-कार्लाइल

विद्या पुस्तक से नहीं मिलती, वरन् जीवन-रूपी पुस्तक के अध्ययन से मिलती है, अनुभव से प्राप्त होती है।

-लालजी राम

जो सीखता है मगर विद्या का उपयोग नहीं करता, वह किताबों से लदा भारवाहक पशु है।

-शेख सादी

शिक्षा ईंट और चूने से बने मकान की भांति नहीं है, जिसका नक्शा मिस्त्री पहले से ही तैयार रखता है। शिक्षा वृक्ष की भांति है जो अपने जीवन की लय के साथ ताल मिलाकर उसके अनुरूप विकसित होता है।

-रवींद्रनाथ ठाकुर

क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इसका ज्ञान ही सही शिक्षा है, विद्या है।

-अज्ञात

जिसने स्वयं को समझ लिया, वह दूसरों को समझाने नहीं जाएगा।

-अज्ञात

मूर्ख अपने घर में पूजा जाता है, मुखिया अपने गांव में पूजा जाता है, परंतु विद्वान सर्वत्र पूजा जाता है।

-चाणक्य

मूल्यहीन शिक्षा समाज में इंसान को जानवर से बदतर बना देती है।

-शिव खेड़ा

जो बच्चों को सिखाते हैं, उस पर बड़े यदि स्वयं अमल करें तो संसार स्वर्ग बन जाए।

-अज्ञात

विद्या शील के अभाव में शोचनीय हो जाती है और द्वेष से अपवित्र हो जाती है।

-अज्ञात

जीवनोद्धार के उपायों में स्वाध्याय का उपाय सबसे श्रेष्ठ, सरल, सुलभ और सुगम है।

-अज्ञात

अविवेकपूर्ण अध्ययन से बुद्धि को कोई आहार नहीं मिलता है।

-अज्ञात

बच्चों को पहला पाठ आज्ञा-पालन का सिखाना चाहिए।

-अज्ञात

दूसरे के दुर्भाग्य से बुद्धिमान व्यक्ति यह शिक्षा ग्रहण करते हैं कि उन्हें किस बात से बचना चाहिए।

-साइरस

कर्महीन मनुष्य शिक्षा के दान का अधिकारी नहीं हो सकता।

-विनोबा भावे

स्वाधीनता (स्वतंत्रता/आजादी)/देशभक्ति

जब हम अपने जीवित रहने के अधिकार का पूरा मूल्य चुका देते हैं तभी आजादी पाते हैं।

-रवींद्रनाथ ठाकुर

जब तक एक भी व्यक्ति आजादी से वंचित है तब तक कोई भी देश स्वतंत्र नहीं है।

-जवाहरलाल नेहरू

कितनी ही राजनीतिक स्वतंत्रता हो, वह भूखी जनता को संतुष्ट नहीं कर सकती।

-लेनिन

स्वतंत्रता का मूल्य निरंतर सावधानी है।

-जे.पी. कुरन

स्वाधीनता विकास का प्रथम चरण है।

-स्वामी विवेकानंद

स्वतंत्रता की तड़प आत्मा का संगीत है।

-सुभाषचंद्र बोस

देश के लिए जरूरत है ऐसे निःस्वार्थ सेवकों की, जिन्हें न तो धन से खरीदा जा सके और न जिन्हें ताकत ही झुका सके।

-लाला लाजपतराय

किसी से मेहरबानी मांगना अपनी आजादी बेचना है।

-महात्मा गांधी

यदि किसी देशभक्त में मानवीयता कम है तो समझना चाहिए कि उसकी देशभक्ति में भी उस हद तक कमी है।

-प्लूटो

मनुष्य स्वतंत्रता से सुख को प्राप्त करता है। स्वतंत्रता से परम तत्त्व को प्राप्त करता है। स्वतंत्रता से ही शक्ति को प्राप्त करता है तथा स्वतंत्रता ही उसे परम पद दिलाती है।

-अष्टावक्र गीता

देशभक्त जननी का सच्चा पुत्र है।

-जयशंकर प्रसाद

संसार में सज्जन मनुष्य ही स्वतंत्र होते हैं। नीच मनुष्य दास होते हैं।

-प्लूटार्क

देशहित के समक्ष मातृस्नेह की भी परवाह न करने वाली माताओं से देश का नाम उज्ज्वल होता है।

-मुंशी प्रेमचंद

लोकतंत्र बंदर के पिंजड़े से सरकस चलाने की कला और विज्ञान है।

-एच.एल. मेकेन

अपने देश की अच्छे तरीके से सेवा करने वाला अपनी पार्टी की श्रेष्ठ सेवा

करता है।

-रदरफोर्ड हेज

अवसरवादी कहते हैं-हमसे जो थोड़ा बन पाएगा हम करेंगे; जिम्मेदार नागरिक कहते हैं-देश को जो भी चाहिए वह करेंगे।

-शिव खेड़ा

आजादी का अर्थ स्वैच्छिक संयम, अनुशासन और कानून के शासन को स्वेच्छा से स्वीकार करना है।

-महात्मा गांधी

गुलामी मानव-समाज के सभी बुनियादी नियमों के खिलाफ है।

-मांटेस्क्यू

जो अस्थायी सुरक्षा को खरीदने के लिए आजादी छोड़ देते हैं, वे आजादी और सुरक्षा दोनों के ही योग्य नहीं हैं।

-शिव खेड़ा

अधिकतर कानून किसी बुराई के समान हैं क्योंकि ये मनुष्य की आजादी में बाधा डालते हैं।

-जैरेमी बेंथम

आजादी के दुश्मन तर्क नहीं करते हैं, वे शोर मचाते हैं और गोलियां चलाते हैं।

-डीन इंगे

आप दूसरे लोगों की आजादी की रक्षा करके ही अपनी आजादी सुरक्षित रख सकते हैं।

-क्लेरेंस डैरों

दुःखद है कि अच्छे राष्ट्रभक्त को बाकी मानवजाति का दुश्मन मान लिया जाता है।

-वाल्टेयर

सफलता-असफलता

स्वावलंबन सफलता की पहली सीढ़ी है।

-महात्मा गांधी

अनवरत असफलता के सिवा इस दुनिया में सब चीज सहन की जा सकती है।

-गेटे

जहां बुद्धि शासन करती है, वहां सफलता समीप है।

-टॉमसन

सफलता तो तभी मिलती है जब आप अपनी कल्पना के ढांचे में कर्म का रंग भी भरें।

-स्वेट मार्डेन

मनुष्य का जन्म जीवन-संघर्ष में सफलता के लिए हुआ है, विफल होने के लिए नहीं।

-हेनरी डेविड थोरियू

सफल मनुष्य वह है जो दूसरे लोगों द्वारा अपने पर फेंकी गई ईंटों से एक मजबूत नींव डाल सकता है।

-इरविंग स्टोन

सफलता का यदि कोई रहस्य है तो वह दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण को समझने तथा उसके एवं अपने दृष्टिकोण से वस्तुओं को देखने में छिपा

-हेनरी फोर्ड

सच्चा प्रयास कभी निष्फल नहीं होता।

-विलसन

असफलता गिरने में नहीं, असफलता गिरकर हार मान लेने में है।

-स्वेट मार्डेन

बहुत से व्यक्ति यदि महान् आकाक्षाओं से आक्रांत न होते, तो छोटी बातों में अवश्य सफल हो जाते।

-लांगफेलो

अपने काम को चांद, तारों और सूरज के काम की तरह निःस्वार्थ बना दो, तभी सफलता मिलेगी।

-स्वामी रामतीर्थ

महान् लक्ष्य के लिए प्रयास करने में ही आनंद है। अच्छे प्रयास में सफलता का भाव है।

-जवाहरलाल नेहरू

सफलता अपने हाथों में नहीं, किंतु मेहनत अपने हाथों में है!

-अज्ञात

लक्ष्य के प्रति एक निष्ठा, तन्मयता और एकाग्रता ही सफलता की कुंजी

-अज्ञात

सफलता अदम्य उत्साह और सतत प्रयत्न की भगिनी है।

-अज्ञात

विजय और सफलता से क्षणों में संयम रखकर ही महान लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

-बिस्मार्क

सफलता उनके द्वारा पाई व सुरक्षित रखी जाती है, जिनके चिंतन की दिशाधारा विधेयात्मक है।

-अज्ञात

कुछ सफलताएं पिछली असफलताओं की कमी को पूरा कर देती हैं।

-राबर्ट ब्राउनिंग

यदि आप परिश्रम से घबराएंगे तो समझिए सफलता आपसे दूर चली गई

-स्वेट मार्डेन

ईमानदारी से किया गया परिश्रम सफलता को और समीप ला देता है।

-अज्ञात

संकल्प और सफलता एक-दूसरे के पूरक हैं।

-स्वेट मार्डेन

व्यवहार/संस्कार/संस्कृति

माता एक भाई पैदा करती है, वाणी दूसरा उत्पन्न करती है, वाणी से उत्पन्न भाई सहोदर से भी उत्तम एवं हितैषी होता है।

-हितोपदेश

विनय व्यवहार में व्यक्त होने वाली शिष्टता है।

-कालीदास

अच्छे संस्कार खरीदे नहीं जाते हैं और न ही रास्ते में पड़े हुए मिलते हैं।

-अज्ञात

मनुष्य को अत्यंत सरल और सीधे स्वभाव का भी नहीं होना चाहिए। इससे सब लोग उसे दुर्बल मानने लगते हैं और हर समय उसे कष्ट देने का प्रयत्न करते हैं-जंगल में सीधे पेड़ काट दिए जाते हैं जबकि टेढ़े-मेढ़े वृक्षों को कोई हाथ भी नहीं लगाता!

-चाणक्य

हमारे स्वभाव का प्रभाव हमारे परिवार के दूसरे सदस्यों की उन्नति या अवनति पर भी पड़ता है।

-स्वेट मार्डेन

व्यक्ति का अंतःकरण ईश्वर की वाणी है।

-बायरन

एक-दूसरे का सम्मान और शिष्टाचार ही संस्कृति की आधारशिला है।

-महात्मा गांधी

व्यवहार के दर्पण में प्रत्येक वस्तु का प्रतिबिंब देखा जा सकता है।

-गेटे

हरेक संस्था को सिद्धांतवादियों की आवश्यकता होती है, वरना उसमें जीवन और दृढ़ता नहीं आ सकेगी। परंपराओं के बिना आपका व्यक्तित्व नष्ट हो जाता है।

-प्रेमचंद

परोपकार के लिए मरने का सौभाग्य तो संस्कार वालों को ही प्राप्त होता

-प्रेमचंद

मनुष्य की बुद्धि और विनाश उसके अपने व्यवहार पर निर्भर करता है।

-चाणक्य

स्वभाव ही मनुष्य के जीवन का स्वर्ग या नरक निर्धारित करता है।

-स्वेट मार्डेन

उपलब्धि के लिए सुविधाओं और योग्यता के अलावा एक और चीज की भी जरूरत होती है जिस का नाम है-रवैया। अगर आपका रवैया सही होगा तभी आप अपनी योग्यता का अधिकतम उपयोग कर पाएंगे और आपको उसके अच्छे परिणाम अपने-आप मिलेंगे।

-प्रोफेसर अर्विन एच. रोल

जो व्यक्ति दूसरों के गुप्त भेद तुम्हारे सामने प्रकट करे, उसे अपने गुप्त अटों से अवगत न होने दो, क्योंकि जो व्यवहार वह दूसरों के साथ कर

रहा है वही तुम्हारे साथ करेगा।

-हजरत अली

नारी-अनमोल वचन

जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं।

-मनुस्मृति

सभी महान कार्यों के आरंभ में औरत का हाथ रहा है।

-लामार्टिन

स्त्रियों के हक पवित्र हैं। उन्हें दिए गए अधिकार अबाधित रहें, इस बात की सावधानी रखो।

-हजरत मोहम्मद

आभूषणों से स्त्रियां नहीं सजतीं, वे सजती हैं अपने सत्य से, अपने रूप से और अपने स्वभाव की पवित्रता से।

-जयशंकर प्रसाद

यदि पुरुष के जीवन-विकास में स्त्री का आकर्षण विनाशकारी होता तो प्रकृति यह आकर्षण पैदा ही क्यों करती?

-यशपाल

नारी के बिना पुरुष की बाल्यावस्था असहाय है, युवावस्था आनंदरहित हैं और वृद्धावस्था सांत्वना-शून्य है।

-भगवतीचरण वर्मा

लज्जा और विनय ही भारत की देवियों का आभूषण है।

-प्रेमचंद

पुरुष में नारी के गुण आ जाते हैं तो वह महात्मा बन जाता है। नारी में पुरुष के गुण आ जाते हैं तो वह कुलटा हो जाती है।

-प्रेमचंद

पुरुषों की शिक्षा स्त्रियों को देना हानिकारक है। शारीरिक व मानसिक दोनों तलों पर, दोनों की प्रकृति भिन्न है। दोनों के लिए एक ही पाठ्यक्रम देना नारीत्व की हत्या करना है। इससे वह पुरुष तो नहीं बन सकी किंतु नकली पुरुष बनकर रह गईं।

-आचार्य रजनीश

केवल सेवा के कारण ही नारी को स्वर्ग में भी महती प्रतिष्ठा मिलती है।

-मनुस्मृति

स्त्री का प्रेम पुरुष को कार्य में असफल, व्यवहार में झूठा, अनुत्तरदायी और जीवन में आवारा बना देता है।

-यशपाल

एक आदर्श जननी सौ गुरुओं से भी श्रेष्ठ है।

-जाज हर्बर्ट

अनमोल वचन

एक स्त्री का शासन ही पुरुष के लिए कठिन काम है।

-वृंदावनलाल वर्मा

मानव सभ्यता पर महान महिलाओं के प्रभाव की छाप महसूस की जा सकती है।

-इमर्सन

महिलाओं के साथ भेदभाव करने के लिए पुरुषों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

-महात्मा गांधी

क्षमा

यदि कोई दुर्बल मनुष्य तुम्हारा अपमान करे तो उसे क्षमा कर दो, क्योंकि क्षमा करना तो वीरों का काम है, परंतु यदि अपमान करने वाला बलवान

है तो उसे अवश्य दंड दो।

-गुरु गोविंद सिंह

दुष्टों का बल हिंसा है। राजाओं का बल दंड का अधिकार है। सज्जनों व गुणवानों का बल क्षमा है।

-महात्मा विदुर

व्यक्ति दंड द्वारा उतना नहीं सुधारता, जितना प्रेम और क्षमा द्वारा।

-अज्ञात

धन

धन या तो स्वामी की सेवा करता है या उस पर शासन।

-होरेस

धनवान कौन है? जिसे संतोष है।

-शेख सादी

धर्म खुद बहुत शक्तिशाली है, पर धन के बिना धार्मिक अनुष्ठान भी नहीं किए जा सकते। इसलिए कहा जाता है कि धन से धर्म की रक्षा होती

-चाणक्य

जहां धन ही परमेश्वर है वहां सच्चे परमेश्वर को कोई नहीं पूजता।

-स्वामी रामतीर्थ

धनहीन होने और दरिद्र होने में अंतर है। धनहीन व्यक्ति श्रीमान सकता है और धनवान दरिद्र। क्योंकि दरिद्र तो वह है जिसकी तृष्णा विशाल है, और जिसकी भूख शांत नहीं होती।

-आदि शंकराचार्य

अधिक धनी होने पर भी जो असंतुष्ट रहता है, वह सदा निर्धन है। धन से रहित होने पर भी जो संतुष्ट है, वह सदा धनी है।

-अश्वघोष

धन-संग्रह की अपेक्षा तपस्या का संग्रह श्रेष्ठ है।

-वेदव्यास

प्रसन्नता में योगदान देने वाली वस्तुओं में स्वास्थ्य से बढ़कर और धन से घटकर कुछ नहीं।

-शॉपेन हावर

सुविचार संग्रह

धन की जीवन में जरूरत है-जैसे पित्त की स्वास्थ्य के लिए, पर धन के प्रभाव में मदहोश नहीं होना चाहिए।

-साईं बाबा

दुनिया में धन सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण चीज है। यह सेहत, ताकत, सम्मान, उदारता और सौंदर्य का प्रतिनिधित्व करता है।

-बर्नार्ड शॉ

कुछ जीव हैं जिनसे सावधान रहना चाहिए। वे हैं-धनवान आदमी, कुत्ता, सांड और शराबी।

-रामकृष्ण परमहंस

धन का देना मित्रता का कारण होता है, परंतु वापस लेना शत्रुता का

-शुक्राचार्य

तभी धन है जब वह किसी उद्योग उपयोग में लगा रहे, अन्यथा उसमें और कूड़े-करकट में क्या अंतर?

-पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

धन जैसे ही अपनी सीमा लांघता है, कुरूप दिखने लगता है।

-अज्ञात

पैसा बचाने और खर्च करने वाला व्यक्ति सबसे सुखी है, क्योंकि वह दोनों तरह के आनंद ले सकता है।

-सैमुअल जॉनसन

अगर आगे-आगे धन हो तो सब रास्ते आसानी से खुलते जाते हैं।

-शेक्सपीयर

संपत्ति को अपने अधिकार में रखो, स्वयं संपत्ति के अधिकार में मत हो जाओ।

-अज्ञात

तलवार की कीमत म्यान से नहीं, बल्कि धार से मापी जाती है; इसी प्रकार मानव की कीमत धन से नहीं, सदाचार से आंकी जाती है।

-पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

धन हाथ या पैर के समान है। उसका उपयोग कीजिए, अन्यथा आप उसे खो देंगे।

-हेनरी फोर्ड

कर्म/कर्मठता पुरुषार्थ परिश्रम

कर्महीन अत्यधिक अध्ययन मनुष्य को मिटा डालता है।

-बाइबिल

मनुष्य का निर्माण भाग्य नहीं, पुरुषार्थ करता है। गौरव परिश्रम का अनुगामी है। काम आत्मा के लिए रसायन का काम करता है। श्रम ही मनुष्य की आत्मा है।

-स्वामी कृष्णानंद

किसी अड़चन से हताश न होकर, आत्मविश्वास न खोकर, अनवरत कार्यरत रहना ही तुम्हारा कर्त्तव्य है, अगर यह किया तो उसके सुंदर फल दिन-दिन बढ़ते हुए परिमाण में तुम्हारी सेवा में हाजिर रहेंगे।

-स्वामी विवेकानंद

शिक्षाप्रद सुविचार

अकर्मण्यता से जीवन से यशस्वी जीवन और यशस्वी मृत्यु अधिक अच्छी है।

-सर सी.वी. रमन

इस संसार में वही व्यक्ति सफल होते हैं जो परिस्थितियों को अपने अनुकूल बना लेते हैं और यदि वे नहीं बना सकते तो अपने अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर लेते हैं।

-बर्नार्ड शॉ

अभ्यास की दृष्टि हो तो साधन काम आते हैं। अभ्यास की दृष्टि न रही तो उत्तम साधन भी निकम्मे हो जाते हैं।

-विनोबा भावे

प्रतिज्ञाहीन जीवन बिना नींव का घर है। प्रतिज्ञा के बल पर ही संसार टिका हुआ है। प्रतिज्ञा न लेने का अर्थ अनिश्चित या डांवाडोल रहना है।

-महात्मा गांधी

मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं है, परिस्थितियां मनुष्य की दास हैं।

-डिजरायली

प्रतिभा महान् कार्यों को प्रारंभ करती है, किंतु परिश्रम उसे समाप्त करता

-जोवरी

संसार इस बात की चिंता नहीं करता कि हमने यहां रहकर क्या कहा, पर वीरों ने जो काम किए, उसे वह कभी नहीं भूलता।

-लिंकन

शक्ति ही जीवन है, परम सुख है।

-स्वामी विवेकानंद

यदि कष्ट को हँसते-हँसते सहन किया जाए तो वह भी सुखद हो जाता है. पर यह तभी हो सकता है जब कर्म को महान् बना दिया जाए।

-अरस्तू

महान विचारकों के विचार (Mahan Vichar )

आलस्य का एकमात्र इलाज काम करना है, स्वार्थ-भावना का इलाज है त्याग, अविश्वास का इलाज है दृढ़ विश्वास, कायरता का इलाज है. जोखिम-भरे काम का बीड़ा उठाना और तन-मन-धन से उसमें जुट जाना।

-रदरफोर्ड

लक्ष्य ही कर्म-शक्ति है।

-स्वामी विवेकानंद

जो महान् उद्देश्य के लिए मरते हैं, उनकी हार नहीं होती है।

-बायरन

परिश्रम सभी पर विजयी होता है।

-होमर

यदि आप परिश्रम से घबराएंगे तो समझिए सफलता आपसे दूर चली गई

-स्वेट मार्डेन

पुरुषार्थ किए बगैर भाग्य का निर्माण नहीं हो सकता।

-वाल्मीकि

Anmol Vachan in Hindi-अनमोल वचन हिंदी ( Best 200+)
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Suvichar in Hindi 2020 | अनमोल सुविचार हिंदी में – Best Quotes
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